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रविवार, 22 दिसंबर 2013

भारत में साम्प्रदायिक समन्वय और शान्ति का महामन्त्र -

भारत में साम्प्रदायिक समन्वय और शान्ति का महामन्त्र -
क्या भारत के सर्वसाधारण मुसलमान का ईमान इनके जैसा हो सकता है? 
शहीद अशफाक उल्लाह खान, शहीद कै अब्दुल हमीद अथवा पू राष्ट्रपति डा अब्दुल कलाम! 
शहीद अशफाक उल्लाह खान (देश हित बलिदान हुए एक क्रन्तिकारी) जी के अंतिम शब्द "जाऊँगा खाली हाथ मगर ये दर्द साथ ही जायेगा, जाने किस दिन हिन्दोस्तान आज़ाद वतन कहलायेगा? बिस्मिल हिन्दू हैं कहते हैं "फिर आऊँगा, फिर आऊँगा, फिर आकर के ऐ भारत माँ तुझको आज़ाद कराऊँगा". जी करता है मैं भी कह दूँ पर मजहब से बंध जाता हूँ, मैं मुसलमान हूँ पुनर्जन्म की बात नहीं कर पाता हूँ; हाँ खुदा अगर मिल गया कहीं अपनी झोली फैला दूँगा, और जन्नत के बदले उससे एक पुनर्जन्म ही माँगूंगा." 
शहीद कै अब्दुल हमीद (जुलाई 9, 1933 - सितम्बर 10, 1965खेमकरण सेक्टर में पाकिस्तान के अभेद्य पैटन टैंकों को ध्वस्त कर विजय पताका फहराने वाले अदम्य साहसी देशभक्त ने लड़ते हुए 32 वर्ष की आयु में ही अपने प्राणों को देश पर न्यौछावर कर दिए। 1954 में सैनिक भर्ती होकर घुसपैठियों को मजा चखाते, जब आतंकवादी डाकू इनायत अली को पकड़वाया तो प्रोन्नति में लांसनायक बने। मरणोपरांत परमवीरचक्र व कैप्टन  प्रोन्नति दी गई। 
 पू राष्ट्रपति डा अब्दुल कलाम! जो वर्त्तमान पीढ़ी के आदर्श व महानायक हैं।  सभी सुपरिचित हैं। 
महाप्रश्न -क्या इस देश का सर्वसाधारण मुसलमान, इन्हें आदर्श व महानायक मान कर व्यवहार कर सकता है।  विशेषकर कथित उन भाजपा विरोधी, शर्म निर्पेक्ष खेमों से जुड़ा तो कदापि नहीं।  जिनके मार्गदर्शक ही घोर हिन्दुविरोधी वोटबैंक के ठेकेदार हों।
बिकाऊ नकारात्मक मीडिया का राष्ट्रवादी सकारात्मक व्यापक विकल्प का सार्थक संकल्प - तिलक सम्पादक -युगदर्पण मीडिया  समूह YDMS.
-युगदर्पण मीडिया समूह YDMS- तिलक संपादक
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यह राष्ट्र जो कभी विश्वगुरु था, आज भी इसमें वह गुण,
 योग्यता व क्षमता विद्यमान है | आओ मिलकर इसे बनायें; - तिलक

शुक्रवार, 20 दिसंबर 2013

सांप्रदायिक हिंसा रोकथाम कानून /प्रोत्साहन कानून

सांप्रदायिक हिंसा रोकथाम कानून /प्रोत्साहन कानून
वन्देमातरम, सांप्रदायिक हिंसा रोकथाम कानून पर हमारा मत क्या हो, इससे पूर्व यह समझना आवश्यक है, कि इसमे है क्या ? किन्तु एक प्रश्न सबसे अधिक सता रहा था।
भारत के विरुद्ध चल रहे इतने बड़े षड्यंत्र के बारे में इस समाज को कैसे बताया और समझाया जाए। देश का मीडिया इस कानून के सांप्रदायिक पक्ष को नही दिखा रहा है, केवल राजनीतिक प्रतिक्रिया दिखा रहा है।क्योंकि सांप्रदायिक मुद्दे पर सत्य कथन को सांप्रदायिक मान मीडिया बच रहा है।
किन्तु, यह बिल विश्वगुरू भारत के अस्तित्व को ही मिटाने का कुत्सित कुचक्र है, पास हुआ तो प्रलय सुनिश्चित है। अस्तित्व रक्षा का नियम है, अंतिम क्षण में सारी ताकत लगानी चाहिए। किन्तु, हम सब पहले यह तो समझे, कि ये बिल देश के लिए अंतिम सर्वनाश का बिल है। यह बिल आने का अर्थ प्रलय है। देश की जनता को बस इतना ही समझाया जा रहा है, कि एक ऐसा बिल आ रहा है, जिसमे सत्ता और विपक्ष में सहमति नही, कुछ असहमती हैं।
किन्तु बात केवल इतनी नही है, बात सहमति की असहमती नही, अस्तित्व की है। ऐसे धर्म व संस्कृति की जिसने विश्व के कोने कोने में अत्याचारों से पीड़ितों को आश्रय दिया। आज के मुस्लिम अल्पसंख्यंक वही हैं, जिन्हे पाकिस्तान की माँग पूरी होने पर, पाकिस्तान के नर्क में जाने से नकारने को, बहुसंख्यंक हिन्दुओ ने विरोध नहीं किया।
सत्ता के वोट बैंक हेतु लम्बे समय से चल रहे, उन हिन्दुओं को साम्प्रदायिक ठहराए जाने के कुचक्र जानकर, तो इसे गहराई से समझना और भी आवश्यक हो जाता है। काले अंग्रेजों के इस साइमन कमीशन पर जब देश का नकारात्मक बिकाऊ मीडिया जनता को भ्रमित करे, तब पायें 
नकारात्मक बिकाऊ मीडिया का सकारात्मक राष्ट्रवादी विकल्प युगदर्पण मीडिया समूह YDMS.
यदि आप भी मुझसे जुड़ना चाहते हैं, तो आपका हार्दिक स्वागत है, संपर्क करें औऱ अपने सम्पर्क सूत्र सहित बताएं कि आप किस प्रकार व किस स्तर पर कार्य करना चाहते हैं, तथा कितना समय देना चाहते हैं ? आपका 
आभार अग्रेषित है। 
2001 से युगदर्पण समचारपत्र द्वारा सार्थक पत्रकारिता और 2010 से हिंदी ब्लॉग जगत में विविध विषयों के 28 ब्लॉग के माध्यम व्यापक अभियान चला कर 3 वर्ष में 60 देशों में पहचान बनाई है। तथा काव्य और लेखन से पत्रकारिता में अपने सशक्त लेखन का विशेष स्थान बनाने वाले तिलक राज के 10 हजार पाठकों में लगभग 2000 अकेले अमरीका में हैं।  -तिलक, संपादक युगदर्पण मीडिया समूह  09911111611, 07531949051 
जो शर्मनिरपेक्ष, अपने दोहरे चरित्र व कृत्य से- देश धर्म संस्कृति के शत्रु;
राष्ट्रद्रोह व अपराध का संवर्धन, पोषण करते। उनसे ये देश बचाना होगा। तिलक
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बुधवार, 18 दिसंबर 2013

देवयानी खोब्रागडे, व अमानवीय अमरीका

WEDNESDAY, DECEMBER 18, 2013

भारतीय विदेश सचिव सुजाता सिंह की कथित अतिसफल वाशिंगटन यात्रा संपन्न होने के अगले ही दिन 
न्यूयार्क में उप महावाणिज्य दूत 1999 भाविसे चयनित देवयानी खोब्रागडे का अमानवीय अपमान भारत और अमेरिका .......पूरा पढ़ने के लिए शीर्षक का बटन 

देवयानी खोब्रागडे, व अमानवीय अमरीका

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विश्वगुरु रहा वो भारत, इंडिया के पीछे कहीं खो गया |
 इंडिया से भारत बनकर ही, विश्व गुरु बन सकता है; - तिलक
घर 4 दीवारी से नहीं 4 जनों से बनता है, परिवार उनके प्रेम
और तालमेल से बनता है | आओ मिलकर इसे बनायें; - तिलक
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